भारतीय बैंकों से करोड़ों का ऋण लेकर विदेश भागे शराब व्यापारी विजय माल्या ने पिछले बुधवार को एक बयान दे कर भारतीय राजनीति को फिर से गरमा दिया है। गए बुधवार को लंदन की एक अदालत के बाहर उन्होंने कहा कि वो भारत छोड़ने से पहले फाइनेंस मिनिस्टर अरुण जेटली से मिले थे और पूरे मामले का निष्पादन करना चाहते थे पर बैंकों द्वारा आपत्ति दर्ज करने की वजह से ये मामला सुलझ नहीं पाया।

माल्या के इस बयान ने विपक्ष को अरुण जेटली और मोदी सरकार पर हमला बोलने का मौका दे दिया। लोग इस पूरे वाक्ये पर चुटकियाँ लेने लगे। हालांकि विपक्ष के हमलावर ह जाने के बाद माल्या ने ये साफ़ किया की उनकी जेटली से हुई मीटिंग औपचारिक नहीं थी और मीडिया ने उनके बयान को बढ़ा चढ़ा कर पेश कर दिया है। विजय माल्या मीडिया ने आगे कहा की उन्हें देश की दोनों बड़ी पार्टियों भाजपा एवं कांग्रेस ने पॉलिटिकल फुटबॉल बनाया हुआ है और बिना वज़ह उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

लंदन की एक अदालत में माल्या के भारत प्रत्यर्पण पर चल रहे मामले में अब अदालत 10 दिसंबर को अपना निर्णय सुनाएगी। इस निर्णय के आने के बाद ही यह निश्चित होगा कि विजय माल्या को ब्रिटेन से भारत के लिए प्रत्यर्पित किया जायेगा या नहीं। बता दें की विजय माल्या को इसी मामले पर सुनवाई के लिए पिछले बुधवार को लंदन की एक कोर्ट में पेश होना पड़ा जहाँ उन्होंने ये सारी बाते कही। बंद हो चुके किंगफिशर एयरलाइन के प्रमुख माल्या साल 2017 के अप्रैल महीने में जारी किये गए प्रत्यर्पण वारंट के बाद से ही जमानत पर चल रहे हैं। उनपर भारत में लगभग 9000 करोड़ रूपये के फर्जीवाड़े का आरोप है।