एक तरफ जहाँ मैदानी इलाके कोरोना महामारी से जूझ रहे हैं वहीँ दूसरी तरफ पहाड़ी इलाकों पर कुदरत मेहरबान है. पहले तो जनवरी तक बर्फ़बारी के लिए इंतज़ार करना पड़ता था लेकिन इस साल नवंबर से ही पहाड़ों पर सफ़ेद चादर बिछ गई है. हिमाचल (Himachal Pradesh) में शिमला-कुफरी से लेकर मनाली-कसोल और उत्तराखंड (Uttrakhand) के चारो धाम, हरसिल वैली और अन्य ऊंचाई वाले स्थानों पर जमकर बर्फ़बारी हो रही है.

त्योहार ख़त्म होने के बाद घूमने निकले पर्यटकों के लिए ये बर्फ़बारी बोनस की तरह है. वक़्त से पहले की बर्फ़बारी ने लॉकडाउन की वजह से मुश्किलों का सामना कर रहे पर्यटन और होटल उद्योग के चेहरे खिल गए हैं. एक तरफ जहाँ दिल्ली-NCR किसान आन्दोलन और कोरोना वायरस की वजह से मुश्किलों का सामना कर रहे हैं वहीँ दूसरी तरफ पहाड़ों पर पर्यटकों का पहुंचना लगातार जारी है.

उत्तराखंड में चमोली जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बृहस्पतिवार को चौथे दिन भी बर्फबारी हुई. बदरीनाथ धाम में करीब डेढ़ फीट और हेमकुंड साहिब में ढाई फीट बर्फ जम गई है. जोशीमठ, पोखरी, दशोली और घाट क्षेत्र के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी होने से ठंड बढ़ गई है। वहीं, केदारनाथ में भीबर्फ की सफ़ेद चादर बिछ गई है. यमुनोत्री एवं गंगोत्री धाम में भी जमकर बर्फबारी हुई है.