चीन, ईरान और इटली में कहर बरपाने के बाद कोरोना वायरस (Corona Virus) ने भारत मे दस्तक दी. दिल्ली-NCR में एक के बाद एक कई कोरोना के मरीज मिले, जिससे हड़कंप मच गया. अभी तक कोरोना को मारने वाला वैक्सीन नही खोजा जा सका है। पूरी दुनिया के वैज्ञानिक एंटी कोरोना वैक्सीन ढूँढने में व्यस्त है. लेकिन इसी बीच कुछ ऐसा घटित हुआ कि सबकी आंखे चुंधिया गई और पूरी दुनिया भुचक्की रह गई.

दरअसल खबर आई कि भोजपुरी गाना ‘लहंगा में वायरस कोरोना घुसल बा’ सुनकर कोरोना के जीवाणु मर रहे हैं. हालाँकि मेडिकल साइंस इसे नकार रहा है. मेडिकल साइंस का कहना है कि ये बचकानी और बेवकूफी भरी बात है कि कोरोना का जीवाणु एक घटिया सा भोजपुरी गाना सुन कर मर जाए. सवाल उठाया गया कि जब कोरोना वायरस डेटोल लिक्विड से नहीं मर पा रहा तो वो भोजपुरी गाने से कैसे मर जाएगा?

दरअसल हुआ ये कि बिहार के मोतिहारी के एक सरकारी अस्पताल में एक कोरोना पीड़ित लेनिन कुमार भर्ती हुआ था. उसे आइसोलेशन वार्ड में एडमिट किया गया था. उसकी हालत बहुत नाजुक थी. कोरोना ने उसके दिमाग पर गहरा असर डाला था. तभी अस्पताल में काम करने वाली एक नर्स के मोबाइल पर घंटी बजी. उसने रिंगटोन लगा रखा था ‘तोहर लहंगा में वायरस कोरोना घुसल बा’. जैसे ही गाना लेनिन कुमार के कानों में पड़ी, कई दिनों से बेहोश लेनिन होश में आ गया. नर्स के मोबाइल पर कई बार घंटी बजी. जितनी बार घंटी बजती लेनिन की तबियत में सुधार होता जाता. करीब 10 बार ये गाना सुनने के बाद लेनिन कुमार बिलकुल स्वस्थ हो गया.

डॉक्टरों का कहना है कि सारी दवाइयां दे कर हार गए थे. लेकिन भोजपुरी गाने ने कोरोना के जीवाणु को मार दिया. बताया जा रहा है कि अपने ऊपर बने इतने घटिया गाने को सुनकर कोरोना का जीवाणु सदमे में आ गया और उसकी मौत हो गई. ये खबर मीडिया में आते ही इंटरनेट पर इस गाने की मांग अचानक से बढ़ गई. पूरी दुनिया के लोग इस गाने को सुनने लगे जिस वजह से कई म्यूजिक एप्स और कई म्यूजिक साइट्स क्रैश कर गए. वो इतनी ज्यादा मात्रा में ट्रैफिक बर्दास्त नहीं कर सके.

बताया जा रहा है कि जल्द ही इस एंटी कोरोना इस गीत के आविष्कारक गुड्डू रंगील को चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल के लिए नामित किया जाएगा.

Note: यह लेख एक व्यंग है और इसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है.