इसलिए मैं आपसे कहता था टीवी देखना बंद कर दीजिये. लेकिन आपने मेरी नहीं सुनी. क्या मिला आपको टीवी देख कर? कलर्स टीवी ने तो अपनी टीआरपी बढ़ा ली, पैसे बना लिए लेकिन देश को क्या मिला? इस देश की गंगा-जमुनी तहजीब खतरे में आ गई. वो गंगा जमुनी तहजीब जिसकी नींव अकबर महान ने हिन्दू राजकुमारी जोधाबाई से विवाह कर के रखा था. उस दौर में टीवी नहीं था, सोशल मीडिया नहीं था और उस दौर में नहीं थी मोदी और शाह की जोड़ी इसलिए उस दौर में अल्पसंख्यक खुद को सुरक्षित महसूस करते थे. लेकिन आज अल्पसंख्यकों में डर बढ़ गया. आज देश में डर का माहौल है. अल्पसंख्यकों से कागज़ माँगा जा रहा है, उन्हें बिग बॉस (Big Boss) जीतने से रोका जा रहा है और एक बार फिर इस देश में ब्राह्मणवाद अपनी जड़ें जमाता जा रहा है. 

बड़ी विडम्बना हैअसीम रियाज (Asim Riaz) जैसे अल्पसंख्यक को बिग बॉस जीतने से रोक कर एक ब्राह्मण सिद्धार्थ शुक्ला (Siddharth Shukla) को विजेता बना दिया गया. वोटों में हेर फेर की गई. विपक्ष सालों से मांग कर रहा है कि बैलेट पेपर के जरिये वोटिंग होनी चाहिए लेकिन इस देश में विपक्ष की सुनता कौन है? आपको तो डिजिटल इंडिया बनाना है. डिजिटल इंडिया बनाते बनाते आईटी सेल नाम का महाविनाशक हथियार विकसित हो गया. इसी आईटी सेल के दम पर चुनाव जीतते आये हैं अब इसी आईटी सेल के दम पर अल्पसंख्यकों को बिग बॉस जीतने से रोका जा रहा है. फिर आप ये मान लीजिये कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास का नारा जो था वो खोखला था.

एक अल्पसंख्यक को साथ इतना बड़ा अन्याय हो गया लेकिन गोदी मीडिया चुप है. ये गोदी मीडिया उस दिन भी चुप था जब एक अल्पसंख्यक हिना खान के बदले शिल्पा शिंदे को बिग बॉस की ट्रॉफी पकड़ा दी गई थी. अगर आपने इसके खिलाफ उसी दिन आवाज उठाया होता तो आज एक अल्पसंख्यक असीम रियाज के साथ नाइंसाफी नहीं होती. अगर आपने उसी दिन आन्दोलन खड़ा किया होता तो आज एक और अल्पसंख्यक असीम रियाज को कोई ब्राह्मण इस तरह से अपमानित नहीं कर पता.

लेकिन बड़ी विडम्बना है… आप सब कुछ सहते हैं. गोदी मीडिया से कुछ भी उम्मीद करना बेमानी है. उसका जमीर मर चुका है. उसकी आत्मा बिक चुकी है. लेकिन आप तो जगे हुए हैं. अगर नहीं जगे तो जगाइए अपनी आत्मा को. रिजेक्ट कर दीजिये उस टीवी को, रिजेक्ट कर दीजिये उस चैनल को जो आपके ही अल्पसंख्यक भाइयों के साथ अन्याय करता है. आप एक बार इनका कनेक्शन हटा कर तो देखिये. सब सही हो जाएगा. अब आपके ही दवाब से कुछ होगा. आन्दोलन खड़ा कीजिये इस टीवी, इस चैनल, इस अल्पसंख्यक विरोधी सरकार के खिलाफ… वरना ये अँधेरा ही आज के इस टीवी की सच्चाई बन कर रह जायेगी.

हम देखेंगे
लाज़िम है कि हम भी देखेंगे
वो दिन कि जिसका वादा है
जो Ndtv के संविधान में लिखा है 

जब ज़ुल्म-ओ-सितम से भरी साहेब-शाह की जोड़ी 
रुई की तरह उड़ जायेगी 
हम मैग्सेसे विजेता के पाँव तले
ये धरती धड़-धड़ धड़केगी 
और ब्राह्मणवाद के सर ऊपर
जब बिजली कड़-कड़ कड़केगी 

जब आपके घर ड्राइंग रूम से 
सब टीवी उठवाए जाएँगे 
तब कोई अल्पसंख्यक 
बिग बॉस के तख़्त पर बिठाए जायेंगे  

हम देखेंगे .. लाजिमी है की हम भी देखेंगे