तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) के मरकज का काण्ड सामने आने के बाद देश में हाहाकार मचा हुआ है. लेकिन एक आदमी निश्चिन्त है. वो आदमी है यूनेस्को द्वारा प्रमाणित ब्रह्माण्ड के सर्वश्रेष्ठ पत्रकार मैग्सेसे विजेता महामहिम रवीश कुमार.  उसके अनुसार कोई ऐसी बड़ी बात नहीं हुई है जिसपर इतना हाहाकार मचाया जाए. इसलिए रामायण सीरियल के प्रसारण पर 52 बीघे में रुदन क्रंदन करने वाले रवीश कुमार ने मरकज़ के जमातियों पर एक शब्द भी व्यर्थ नहीं किया.

कहाँ तो रामायण के प्रसारण से सरकार के काम रुक गए थे, कोरोना के खिलाफ लड़ाई कमजोर हो गई थी, देश में आपातकाल जैसी स्थिति हो गई थी, राहत कार्य रुक गए थे. लेकिन अब जमातियों के धर्मार्थ काम के खुलासे के बाद देश में सब ठीक हो गया है. इसलिए यूनेस्को द्वारा प्रमाणित ब्रह्माण्ड के सर्वश्रेष्ठ पत्रकार मैग्सेसे विजेता महामहिम रवीश कुमार ने जमात के शांतिदूतों की तारीफ में कुछ नहीं कहा. अपने फेसबुक वाल पर बीघा तो छोडिये, एक इंच भी व्यर्थ नहीं किया.

रवीश बाबू का वक़्त और उनका फेसबुक वाल बहुत कीमती है. उनका कीमती वक़्त उनके साथी के डेस्क पर रखी ओसामा बिन लादेन की प्रतिमा को बेशर्मी से राशियाँ गुडिया बबुस्का साबित करने के लिए हैं. उनका कीमती वाल जामिया के पत्थरबाज छात्रों के हाथों के पत्थर को वॉलेट साबित करने के लिए है. कहाँ वो इसे मासूम जमातियों के लिए बर्बाद करेंगे.

जरा सोचिये अगर किसी मंदिर में ऐसा हुआ रहता तो कितना हंगामा होता, कितना बवाल मचा होता, देश खतरे में आ गया होता, डेढ़ सौ बीघा में रवीश कुमार रुदन क्रंदन कर रहे होते, हिन्दुओं की लापरवाही पर रवीश कुमार एक महाकाव्य लिख चुके होते. ऐसे ही थोड़े न वो यूनेस्को द्वारा प्रमाणित ब्रह्माण्ड के सर्वश्रेष्ठ पत्रकार मैग्सेसे विजेता महामहिम रवीश कुमार हैं.