जिसकी उम्मीद थी वही हुआ. ब्रह्माण्ड के एकमात्र सर्वश्रेष्ठ और सत्यवादी, मैग्सेसे अवार्ड विजेता पत्रकार रवीश कुमार (Ravish Kumar) कभी अपने फैन्स को निराश नहीं करते. हर बार उम्मीदों पर खड़े उतरते हैं. इस बार भी वो सबकी उम्मीदों पर खड़े उतरे.

पिछली बार तो उन्होंने जामिया के पत्थरबाज छात्रों के हाथों के पत्थर को वॉलेट/पर्स कह दिया था. लेकिन इस बार दिल्ली के जाफराबाद की सड़कों पर खुलेआम बन्दूक लहराता और पुलिस पर बन्दूक ताने हुए शाहरुख़ के हाथों में बन्दूक को पिचकारी कहना असंभव हो गया तो उन्होंने नया प्रपंच रचा. मक्कारी के लेवल को एक नयी ऊँचाइयों पर ले गए. उन्होंने शाहरुख़ का धर्म ही बदल दिया. उन्होंने शाहरुख़ को अनुराग मिश्रा साबित करने की कोशिश की.

24 फ़रवरी की दोपहर को शाहरुख़ का विडियो पूरी दुनिया ने देखा. 24 फ़रवरी की रात ही पुलिस ने कह दिया कि उसका नाम शाहरुख़ है और वो मौजपुर का रहने वाला है. लेकिन 26 फ़रवरी को रवीश कुमार अपने प्राइम टाइम में बताते हैं कि पुलिस उसका नाम शाहरुख़ बता रही है लेकिन सोशल मीडिया पर लोग उसे अनुराग मिश्रा बता रहे हैं.

अपने प्राइम टाइम में रवीश कहते हैं  ‘दिल्ली पुलिस कह रही है वो शाहरुख़ है लेकिन सोशल मीडिया पर उसे अनुराग मिश्रा बताया जा रहा है. दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता क्योंकि JNU के गुं’डों को पकड़ नहीं पाई है, जामिया लाइब्रेरी को लेकर झूठ बोला इसलिए दिल्ली पुलिस की बातों पर भरोसा नहीं किया जा सकता कि गो’ली चलाने वाला शाहरुख़ है. दिल्ली पुलिस को जल्द से जल्द उसके बारे में दोबारा लोगों को बताना चाहिए.’ 

मतलब ये कि रवीश कुमार सीधे सीधे कह रहे हैं कि जब तक दिल्ली पुलिस शाहरुख़ को अनुराग मिश्रा घोषित नहीं करेगी वो दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं करेंगे. मतलब की अगर शाहरुख़ के हाथों में बन्दूक को पिचकारी साबित ना कर सकें रवीश कुमार तो उसका धर्म ही बदलने लगे और इसके लिए सहारा लिया सोशल मीडिया पर चल रही कुछ  अफवाहों का. ये वही रवीश कुमार हैं जो अपने ऊपर बने मीम का भी फैक्टचेक करवाते है. ये वही रवीश कुमार हैं जो व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी पर तंज कसते रहते हैं. मैग्सेसे अवार्ड विजेता उसी व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी पर चल रही कुछ पोस्ट के आधार पर शाहरुख़ को अनुराग मिश्रा साबित करने की कोशिश करते हैं. मतलब कि अगर व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी की खबर रवीश कुमार के एजेंडे के हिसाब से है तो उसे प्राइम टाइम पर चला कर प्रोपगैंडा फैला लो और अगर उनके एजेंडे के हिसाब से नहीं है तो उसे व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी की बता कर ख़ारिज कर दो. 

टाइम्स ऑफ़ इंडिया और नवभारत टाइम्स ने अपने फैक्ट चेक में साबित कर दिया कि जिसे अनुराग मिश्रा साबित करने की कोशिश की जा रही है वो अनुराग मिश्रा नहीं है.

एक से बढ़कर एक मक्कार देखे लेकिन रवीश के आगे सब के सब मासूम लगने लगे हैं अब. रवीश बाबू, शाहरुख़ को लेकर कहीं आप जरूरत से ज्यादा दुखी और रोंदू तो नहीं हो रहे.