राज्यसभा की खाली हो रही 55 सीटों पर जल्द ही चुनाव होने वाले हैं. सभी पार्टियों ने अपने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है. कांग्रेस ने भी अपने 12 उम्मीदवारों की घोषणा की है. इसमें सबसे चौकाने वाला रहा हरियाणा से पूर्व मुख्यमंत्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा के बेटे दीपेन्द्र हुड्डा (Deepender Hooda) का नाम. ये नाम चौकाने वाला इसलिए था क्योंकि राहुल गाँधी अपने चहेते रणदीप सुरजेवाला (Randeep Surjewala) को राज्यसभा भेजना चाहते थे. आखिरी वक़्त तक उनका नाम लगभग तय था लेकिन दीपेन्द्र हुड्डा के नाम की घोषणा हो गई.

हुआ दरअसल ये कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस से बगावत कर के उनलोगों का काम आसान कर दिया जो लम्बे वक़्त से अपनी नाराजगी दबा कर बैठे हुए थे. हरियाणा से दो नाम आगे चल रहे थे. एक कुमारी शैलजा और दूसरा नाम रणदीप सुरजेवाला का. कुमारी सैलजा सोनिया गांधी की भरोसेमंद हैं तो रणदीप सुरजेवाला राहुल गाँधी के. लेकिन भूपेन्द्र सिंह हुड्डा अड़ गए कि अगर दोनों में से किसी को भी राज्यसभा भेजा गया तो सिंधिया के रास्ते पर चल निकलेंगे.

कुमारी शैलजा हरियाणा कांग्रेस की अध्यक्ष है इसलिए हुड्डा उनके खिलाफ थे जबकि सुरजेवाला 2 विधानसभा चुनाव हार चुके हैं इसलिए हुड्डा का कहना था कि सुरजेवाला को हरियाणा तो क्या देश के किसी भी राज्य से विधानसभा नहीं भेजा जाना चाहिए.  हुड्डा ने यह साफ कर दिया कि यदि सुरजेवाला या कुमारी शैलजा में से किसी को उम्मीदवार बनाया जाता है, तो पार्टी के विधायक विद्रोह कर सकते हैं.

सिंधिया जैसे नेता को गंवाने के बाद कांग्रेस हरियाणा में बगावत झेलने को बिलकुल तैयार नहीं थी इसलिए सुरजेवाला का पत्ता कट गया और दीपेन्द्र हुड्डा के नाम का ऐलान हो गया.