दिल्ली के निजामुद्दीन में स्थित तबलीगी जमात (Tablighi Jamaat) का मुख्यालय कोरोना वायरस का हेड क्वार्टर बन गया है. जमात ने जो किया है वो आपराधिक श्रेणी का कृत्य है. केंद्र और राज्य सरकारों के होश उड़े हुए हैं. स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन में हडकंप मचा हुआ है. लेकिन कुछ लोग जमात की हरकतों पर लीपापोती करने पर उतारू हो गए हैं. उन्ही में से एक हैं वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई. राजदीप सरदेसाई (Rajdeep Sardesai) तो तबलीगी जमात का नाम लेने में भी शरमा गए.

जमात का काण्ड सामने आने के बाद राजदीप सरदेसाई ने एक ट्वीट किया. उन्होंने लिखा ‘6 लोग जिन्होंने दिल्ली में एक  धार्मिक कार्यक्रम में मार्च के मध्य में हिस्सा लिया था, उनकी तेलंगाना में कोरोना वायरस से मौत हो गई. दुखद और चिंताजनक. सैकड़ों और लोग , जो उस धार्मिक कार्यक्रम में हिस्सा लिए थे, उनको ट्रैक और क्वारंटाइन किया जा रहा है. एरिया को सील किया जा चुका है और FIR दर्ज की जा चुकी है.’ 

राजदीप ने बहुत ही अच्छे ढंग से गंगा-जमुनी तहजीब को डिफेंड किया. उनके ट्वीट में न तो धार्मिक जलसे का नाम था, न इलाके का नाम था, न राजदीप ने इस बात का जिक्र किया कि वो इस्लामिक कार्यक्रम था और न ही संगठन का नाम था. राजदीप ने सबकुछ बहुत ही आराम से लीपापोती कर दी. जबकि तबलीगी जमात और निजामुद्दीन मरकज के बारे में सारे न्यूज चैनल और सोशल मीडिया पर ख़बरें चल रही थी.

लोगों ने राजदीप के इस सस्पेंस वाले ट्वीट को नोटिस कर लिया और फिर उसके बाद उनकी लंका लगा दी. किसी ने पूछा किस तरह का धार्मिक कार्यक्रम? कुम्भ मेला? लेकिन कुम्भ चलता तो आप जरूर धार्मिक आयोजन का नाम लिखते’ तो किसी ने कहा ‘मज़हब लिखने में शर्म आ रही है?’ देखिये लोगों ने किस तरह राजदीप का छीछालेदर किया-