यूँ तो राजस्थान अपने राजपूती गौरव और किलों के लिए प्रसिद्द है लेकिन किलों से इतर एक जगह ऐसा भी है जो हिन्दुओ का प्रसिद्द तीर्थ है। हम बात कर रहे हैं पुष्कर की। अजमेर से 14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित पुष्कर को अरावली पर्वत श्रृंखला का नाग पर्वत अजमेर से अलग करता है।

पुष्कर पूरी दुनिया में ब्रह्मा मंदिर और अपने मेले के लिए प्रसिद्द है। कार्तिक महीने में लगने वाला पुष्कर मेला (Pushkar fair) पूरी दुनिया के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस बार पुष्कर मेला 04 नवम्बर से शुरू होकर 12 नवम्बर को समाप्त होगा।

पुष्कर को पृथ्वी पर भगवान् ब्रह्मा का घर कहा जाता है। हिन्दू धर्म में पुष्कर को एक महत्वपूर्ण तीर्थ माना गया है। कहा जाता है कि एक बार पुष्कर की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। ब्रह्मा मंदिर के बगल में पुष्कर झील स्थित है। कार्तिक महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस झील में डूबकी लगाने आते हैं। झील में डुबकी लगाने के लिए चारो ओर 52 घाट बने हैं।

ब्रह्मा मंदिर

पुष्कर मेला

रंग रंगीलो राजस्थान को परिभाषित करता है पुष्कर का विश्व प्रसिद्द पुष्कर मेला। पुष्कर मेला दुनिया का सबसे बड़ा ऊंटों का मेला है। जहाँ सज धज कर ऊंट पहुँचते हैं। ये मेला इतना रंग-बिरंगा होता है कि दुनिया भर के फोटोग्राफर्स इस मेले का साल भर इंतज़ार करते हैं ताकि यहाँ के रंगों को अपने कैमरे में कैद कर सकें।

मेले के दौरान भारत के ग्रामीण क्षेत्रों से लाखों लोग अपने ऊटों और अन्य पशुओं के साथ यहाँ जुटते हैं। मेले के दौरान यह छोटा कस्बा एक सांस्कृतिक राजधानी में तब्दील हो जाता है। रंग-बिरंगे राजस्थानी परिधान पहने जादूगर, कलाबाज, लोक नर्तक, व्यापारी, भांड, साधू, पर्यटक यहां पहुंचते हैं और एक अद्भुत रंग बिखरते हैं। ऊंटों की दौड़, घोड़ों की दौड़ देखना सुखद अहसास होता है। मटका फोड़ प्रतियोगिता, सबसे बड़ी मूंछ प्रतियोगिता, पतंगबाजी प्रतियोगिता, पगड़ी बांधो प्रतियोगिता विदेशी सैलानियों को भारतीय संस्कृति से परिचित कराता है। इस मेले की सबसे बड़ी खासियत है भातरीय सैलानियों और विदेशी सैलानियों के बीच होने वाला लगान का मैच।

पगड़ी बांधो प्रतियोगिता में हिस्सा लेते विदेशी सैलानी

राजस्थानी लोक संगीत और लोक नृत्य का यहाँ ऐसा समा बंधता है कि आप उसमे खो कर रह जाएंगे। इसके अलावा विदेशी कलाकारों द्वारा भारतीय और पश्चिमी सभ्यता का अद्भुत मेल कराता फ्यूजन संगीत यहाँ की छटा में चार चाँद लगा देते हैं। यहाँ आप कई बैंड्स के लाइव प्रोफॉर्मेन्स का मज़ा ले सकते हैं।

राजस्थानी व्यंजनों के स्वाद के बिना आपकी पुष्कर यात्रा अधूरी है। दाल बाटी चूरमा, गट्टे की सब्जी का आनंद लेने से ना चुके। शॉपिंग के शौकीनों के लिए भी इस मेले में बहुत कुछ है। राजस्थानी हस्तशिल्प, राजस्थानी बांधनी, राजस्थानी गहनों को देख आप अपनी जेब ढीली करने से खुद को नहीं रोक पाएंगे।

मेले के दौरान पुष्कर जाने की सोच रहे हैं तो अच्छा होगा अपनी बुकिंग पहले ही करा लें। क्योंकि इस दौरान पूरा पुष्कर विदेशी सैलानियों से भर जाता है।

कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग :- हवाई मार्ग से पुष्कर पहुँचने के लिए नजदीकी एयरपोर्ट जयपुर है। जयपुर से पुष्कर की दूसरी करीब 145 किलोमीटर है। जयपुर एयरपोर्ट देश के लगभग सभी बड़े शहरों से जुड़ा है।
सड़क मार्ग :- राजस्थान के विभिन्न शहरों से पुष्कर के लिए बस सेवा उपलब्ध है। जयपुर से पुष्कर की दूरी 145 किलोमीटर, जोधपुर से लगभग 205 किलोमीटर है। अगर आप अपनी कार से दिल्ली से पुष्कर जाने की सोच रहे तो दिल्ली से पुष्कर की दूरी करीब 415 किलोमीटर है।
रेल मार्ग :- पुष्कर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है अजमेर। अजमेर से पुष्कर की दूरी 15 किलोमीटर है। अजमेर देश के सभी भागों से एक बेहतरीन रेल नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।