न्यू ईयर पार्टी में दोस्तों के साथ दारूबाजी का आनन्द ले रहे कानपुर के निवासी केसरिया यादव ने उस समय दोस्तों को अचम्भे में डाल कर भुचक्का कर दिया जब उसने बताया कि वो नए साल में गुटखा खाना बन्द कर देगा।

(फ़ोटो साभार – indiatimes.com)

यहाँ तक कि ये सुनने के बाद सिर्फ चखना पेलने आये एक फ़र्ज़ी दारूबाज दोस्त की कुछ देर के लिए तो फटी की फटी रह गयी। वहीं ग्रुप के अन्य दोस्तों का दारू का नशा एक झटके में उतर गया। केसरिया यादव द्वारा कानपुर की संस्कृति मिट्टी में मिलाने की इस घटिया सोच पर सभी दोस्तों ने जम के लताड़ लगाई और गुटखा छोड़ने पर इसका अंजाम भुगतने की धमकी देकर अच्छी खासी चल रही पार्टी छोड़ कर चले गए।

चखना पेलने वाला दोस्त केसरिया यादव को समझाने के नाम पर उसके साथ रुका रहा और पुराने दिनों की याद दिलाने लगा की कैसे वो गोलगप्पे में रजनीगंधा और विमल डाल कर कहते हुए कानपुर की जिंदगी के मज़े लेते थे। उसने भी केसरिया को तब तक गुटखे की महत्ता पर ज्ञान दिया जब तक सारा चखना खत्म ना हो गया।

कानपुर देहात के रहने वाले महान दार्शनिक अरस्तू निषाद के अनुसार, एक कनपुरिया की औसत जिंदगी में गुटखे का वही महत्व है जो एक्वेरियम की मछली के लिए ऑक्सीजन वाले पंप का होता है। कमलेश के दोस्तों से ज्यादा सदमा गुटखा व्यापार मंडल के मोहल्ला अध्यक्ष पप्पू पीकदान को हुआ जब ये खबर उन तक पहुँची और खबर सुनते ही एक छोटा सा हार्ट अटैक आ गया।

अखिल भारतीय गुटखा प्रेमी मंच के तत्वाधान में गुटखा प्रेमियों ने मुँह में गुटखा दबाकर सड़क किनारे पीक मारते हुए गोल चौक से एक विरोध मार्च निकाली गई और जिलाधिकारी को एकसूत्री ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में केंद्र सरकार से गुटखा ना खाने वाले सभी कनपुरियों का डॉक्यूमेंट चेक करने और गलती पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से डिटेंशन सेंटर भेजकर कानपुर की संस्कृति बचाने की गुजारिश की गई।

Note: यह लेख एक व्यंग है और इसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है।