नेपाल ने अपना नया नक्शा जरी कर उसे संवैधानिक मान्यता दे दी. इस नक़्शे में भारत के तीन इलाके कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा के कुल 395 वर्ग किलोमीटर हिस्सेको नेपाल का बताया गया है और नक़्शे में जगह दी गई है. नेपाल की संसद ने इस नक़्शे को मान्यता दे दी. लेकिन नेपाल की एक सांसद ऐसी थी जो भारत के लिए अपनी ही पार्टी और अपने देश की सरकार से भिड़ गई और नेपाल के इस नक़्शे का विरोध किया.

भारत के पक्ष में अकेले खड़ी होने वाली इस नेपाल (Nepal) सांसद का नाम है सरिता गिरी (Sarita Giri). सरिता गिरी जनता समाजवादी पार्टी की सांसद है और मधेश नेता. नेपाल के मैदानी इलाकों में रहने वाले समुदाय को मधेश कहा जाता है. सरिता गिरी ने संसद के अन्दर नेपाल के इस नए नक़्शे का जोरदार विरोध किया. प्रतिनिधि सभा में जब शनिवार को इस विधेयक पर चर्चा हुई त‍ब सरिता गिरी को बोलने तक नहीं दिया गया. सदन से निकलने के बाद उन्‍होंने कहा कि संसद के अंदर एक महिला का अपमान किया गया और उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की गई. इससे पहले उनके घर पर हमला भी हुआ था और उन्हें देश छोड़ने की धमकी दी गई थी. जब उन्होंने मदद के लिए नेपाल पुलिस को फोन किया तो कोई मदद भी नहीं मिल पाई.

जनता समावाद पार्टी की सांसद सरिता गिरी पार्टी की धमकी के बाद भी ओली सरकार के इस तानशाही भरे फैसले का विरोध कर रही हैं. उनका कहना है कि नेपाल सरकार को पहले भारत और चीन से नए नक्‍शे को लेकर बात करनी चाहिए. इसके बाद नक्‍शे को प्रकाशित करना चाहिए। उन्‍होंने कहा कि नेपाल की जनता स्‍वयं नहीं चाहती है कि नक्‍शे को लेकर भारत के साथ उनका विवाद बढ़े. सरिता गिरी ने यह भी कहा कि लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा के दावे को लेकर नेपाल सरकार के पास पर्याप्‍त साक्ष्‍य नहीं है.

सांसद सरिता गिरी ने सरकार की ओर से नए नक्शे को नेपाली संविधान का हिस्सा बनाने के लिए लाए गए संविधान संशोधन प्रस्ताव पर अपना अलग से संशोधन प्रस्ताव पेश किया था. इसके बाद उन्‍हें जनता समाजवादी पार्टी ने उन्‍हें चेतावनी दी थी. पार्टी ने कहा, ‘सरिता गिरी अपना संशोधन वापस लें नहीं तो उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. अगर सरिता संशोधन प्रस्‍ताव को वापस नहीं लेंगी तो वह न केवल अपना सांसद का दर्जा खो देंगी, बल्कि वह पार्टी की सदस्‍य भी नहीं रहेंगी.’

सरिता गिरी मधेशी समुदाय के हितों की लड़ाई को लेकर साल 2007 में राजनीति में आई थीं. उन्‍हें नेपाली राजनीति की अच्‍छी समझ है. सरिता पर हमेशा से ही ये आरोप लगते रहे हैं कि वह नेपाल के हितों के बजाय भारतीय हितों के बारे में ज्‍यादा सोचती हैं. बताया जाता है कि सरिता अभी भारतीय नागरिक है और उनकी शादी एक नेपाली नागरिक से हुई है.