सुशांत सिंह राजपूत केस दिलचस्प मोड़ पर पहुँच चुका है. जिस तरह की जांच और हरकतें मुंबई पुलिस कर रही है उसे देखते हुए लोग ये कहने को मजबूर हैं कि ये केस भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा कवर अप बन जाएगा, अगर इसकी जांच सीबीआई से नहीं करवाई गई तो. मुंबई पुलिस ने तो इस केस में लीपापोती करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. जिस तरह से सुशांत के एक्स मैनेजर दिशा सालयान की केस फ़ाइल को मुंबई पुलिस ने डिलीट कर दिया और बिहार पुलिस को देने से मना कर दिया उससे अब ये आशंका पक्की होती जा रही है कि इस केस का सम्बन्ध महाराष्ट्र के किसी पॉवरफुल आदमी से है और उसे ही बचाने के लिए सारा प्रपंच रचा जा रहा है.

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दिशा (Disha saliyan) की फ़ाइल डिलीट होने के बाद एक और बड़ी खबर ये सामने आई है कि सुशांत (sushant Singh Rajput) की पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर. ये बात सामने आई है कि सुशांत की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में काफी गड़बड़झाला है. न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक़ सुशांत की पोस्ट मार्टम रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण जानकारियाँ गायब है, या फिर जानबूझ कर गायब की गई है.

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरे मामले में इंवेस्टिगेशन ऑफिसर ने जो शुरुआती सबूत पाया था उसका जिक्र रिपोर्ट में नहीं किया गया है. इसके साथ ही सुशांत के घर से उस दिन वीडियोग्राफ़र ने क्या वीडियो रिकॉर्ड किया था, उसकी भी जानकारी रिपोर्ट में नहीं दी गई है. यहां तक कि डेड बॉडी की हाइट या कोई आइडेंटिटी मार्क भी रिपोर्ट में नहीं बताया गया है.

मौत होने के बाद बॉडी  में क्या बदलाव आया इसकी जानकारी नहीं दी गई, जिससे मौत के समय का पता चलता है. इसके साथ ही डेड बॉडी की स्थिति की जानकारी भी इसमें नहीं दी गई है, जैसे जीभ निकली हुई थी या नहीं, आंख खुली थी या बंद. बॉडी को किस पोजिशन में उतारा गया. बिहार पुलिस के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर यह जानकारी देते हुए बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इन बातों की जानकारी देनी जरूरी होती है.

इसके साथ ही पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताना होता है कि इंटर्नल बॉडी पार्ट में कोई असामान्यता थी या नहीं. जिस वजह से मौत हुई है उसका कोई निशान बॉडी पर था या नहीं. फंदे से लटने के कारण हुई मौत पर बॉडी में जिस तरह के बदलाव होते हैं, जैसे चेहरा पीला हो जाता है, शरीर का रंग बदल जाता है यहां तक की शरीर में कई जगहों पर स्पॉट आ जाते हैं. मुंह से झाग बाहर आ जाता है. गर्दन में खिंचाव आ जाता है जिससे वो लंबी हो जाती है. यहां तक कि जिस चीज से फांसी लगाई जाती है, उसके निशान गर्दन पर बन जाते हैं. इन सभी बातों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताना जरूरी होता है जिसे रिपोर्ट में नहीं बताया गया है.