सुप्रीम कोर्ट के अनुसार आज मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में कमलनाथ (Kamal nath)सरकार को फ्लोर टेस्ट के जरिये अपना बहुमत साबित करना है. लेकिन वो बहुमत साबित कर पायेंगे इसकी उम्मीद न के बराबर है क्योंकि कोर्ट ने भी कह दिया है कि बागियों का विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के वक़्त मौजूद रहना अनिवार्य नहीं है.

अब तो कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने भी मान लिया है कि कमलनाथ सरकार का बचना मुमकिन नहीं है क्योंकि उनके पास बहुमत नहीं है. दिग्विजय सिंह ने ये भी कहा कि बागियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है और बिना बागियों के साथ मिले कमलनाथ बहुमत साबित नहीं कर सकते.

आपको बता दें कि 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद मध्य प्रदेश में कांग्रेस गठबंधन के पास सिर्फ 99 विधायक बचे हैं, जबकि बहुमत के लिए 104 का आंकड़ा चाहिए. वहीं, भारतीय जनता पार्टी के पास 106 विधायक हैं. ऐसे में मुख्यमंत्री कमलनाथ फ्लोर टेस्ट में जाने की बजाय उससे पहले ही अपना इस्तीफा सौंप सकते हैं.

फ्लोर टेस्ट से पहले ही कमलनाथ के इस्तीफे के कयास इसलिए भी लगाए जा रहे हैं क्योंकि फ्लोर टेस्ट से पहले आज दोपहर 12 बजे मध्य प्रदेश के सीएम कमलनाथ प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करेंगे. हालात महाराष्ट्र वाले हैं जैसे देवेन्द्र फडनवीस ने फ्लोर टेस्ट से पहले ही प्रेस कांफ्रेंस कर के इस्तीफ़ा दे दिया था. ठीक उसी तरह कमलनाथ भी फ्लोर टेस्ट से पहले ही इस्तीफ़ा दे सकते हैं.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के बाकी बचे हुए सभी 16 बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए. छह बागी विधायकों के इस्तीफे पहले ही स्वीकार कर चुके हैं. इस प्रकार अब सभी 22 बागी विधायकों के इस्तीफे स्वीकार हो गए हैं.

मध्य प्रदेश के जरिये एक तरह से भाजपा ने महाराष्ट्र का बदला लिया है. भाजपा ने अपने विधायकों को व्हिप जारी करते हुए शुक्रवार को कमलनाथ सरकार के खिलाफ मत देने के लिए कहा है. ऐसा लगता है कि अब शिवराज सिंह चौहान की वापसी निश्चित है.