इजरायल (Israel) में बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) युग का अंत हो गया. 12 सालों से चली आ रही उनकी सत्ता लिकुड पार्टी के हाथों से निकल गई. उनका स्थान गठबंधन सरकार के मुखिया नेफ्टाली बेनेट लेंगे, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. इसका दिलचस्प पहलू ये है कि बेनेट 26 अगस्त 2023 तक ही कुर्सी पर रहेंगे.  इसके बाद येश एटिड पार्टी के चीफ येर लेपिड प्रधानमंत्री बनेंगे. यानी कि अब इजरायल में गठबंधन सरकार का राज होगा. ये 8 अलग अलग विचारधारा वाली पार्टियों का गठबंधन है. इसलिए इसके लम्बे समय तक चलने पर विशेषज्ञों को संशय है. क्योंकि गठबंधन सरकार में विचारधारा का टकराव निश्चित है.

इजराइल में भारत की तरह कई राजनीतिक दल हैं. यानी बहुदलीय व्यवस्था है. इनकी विचारधारा भी अलग-अलग है. नेफ्टाली बेनेट जिस यामिना पार्टी के नेता हैं, वो एक कट्टरपंथी पार्टी हैं. 8 दलों के गठबंधन में येश एटिड पार्टी और राम पार्टी भी है. येश मध्यमार्गी या सेंट्रिस्ट विचारधारा वाली पार्टी है. वो ज्यादा कट्टरपंथी भी नहीं और ज्यादा नर्म भी नहीं है. जबकि राम पार्टी अरब मुस्लिमों का प्रतिनिधित्व करती है.

इजरायल की संसद में कुल 120 सीटें हैं. बहुमत के लिए 61 सांसद चाहिए. पिछले 2 सालों में चार चुनाव हो चुके हैं लेकिन किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिल सका. लेकिन इस बार राष्ट्रवादी बेंजामिन नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए सभी पार्टियाँ एक हो गई और अपने मकसद में कामयाब भी हो गई.

नए गठबंधन में सभी पार्टियों की अलग-अलग सोच है. प्रधानमंत्री भी रोटेटिंग पॉलिसी पर होगा. राम पार्टी पहली बार किसी सरकार का हिस्सा बन रही है. दूसरी अरब मुस्लिम समर्थक पार्टियां इस कोएलिशन में शामिल नहीं हुईं. हालांकि, राम पार्टी के सत्ता में होने से अरब मूल के लोगों को फायदा हो सकता है.