अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए राम जन्मभूमि के समतलीकरण का काम हो रहा है. वहां से मलबों को हटाया जा रहा है ताकि मंदिर का निर्माण हो सके. इसी क्रम के खुदाई के दौरान वहां से देवी-देवताओं की खंडित मूर्तियां मिल रही हैं. समतलीकरण का काम राम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट की ओर से कराया जा रहा है. इस दौरान खुदाई में कई पुरानी मूर्तियाँ, कलश, खम्भे, चौखट और एक बड़ा सा शिवलिंग मिला, जो इस बात को पुख्ता कर रहा है कि वास्तव में वहां पर पुराना मंदिर था जिसे तोड़ कर वहां पर बाबरी ढांचा खड़ा किया गया था.

खुदाई के दौरान 7 ब्लैक टच स्टोन के स्तंभ, 6 रेड टच स्टोन के स्तंभ और करीब 5 फुट का नक्काशीयुक्त शिवलिंग मिला है. अयोध्या (Ayodhya) की तस्वीरें सामने आने के बाद वामपंथी इतिहासकार इरफ़ान हबीब (Irfan Habib) और रोमिला थापर (Romila Thapar) लोगों के निशाने पर आ गए और ट्विटर पर ट्रेंड करने लगे. इन वापमंथी इतिहासकारों पर इतिहास को तोड़ने मरोड़ने के आरोप कई बार लगे हैं. और इस बार भी इन्ही वजहों से ये लोगों के निशाने पर हैं.

दरअसल, वामपंथी इतिहासकार इरफान हबीब ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए थे, जिसमे जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का आदेश दिया गया था. उन्होंने तो सुप्रीम कोर्ट की इस बात को भी मानने से इनकार कर दिया था कि 1856-57 से पहले अयोध्या में नमाज नहीं पढ़ी जाती थी. वह पहले से ही इस बात के खिलाफ हैं कि विवादित भूमि पर कभी मंदिर था.

उन्हीं की तरह एक अन्य बहुत ही प्रसिद्द वामपंथी इतिहासकार रोमिला थापर ने भी आर्कियोलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया की खुदाई में मिले सबूतों को मानने से इनकार कर दिया था. उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को भी स्वीकार नहीं किया था. यही वजह है कि लोग ट्विटर पर दोनों को ही खरी खोटी सुना रहे हैं.

इरफ़ान हबीब और रोमिला थापर पर भड़के लोगों ने कहा, ‘हिंदू विरोधी, भारत विरोधी इतिहासकर जैसे इरफान हबीब, रोमिला थापर को इस मुद्दे पर प्रोपगेंडा के तहत झूठ बोलने, सुन्दर और विस्तृत इतिहास छुपाने और अयोध्या मामले पर कोर्ट को भटकाने के लिए उम्रकैद की सजा होनी चाहिए. यह और कुछ नहीं बल्कि विश्वासघात है.’

एक अन्य यूजर ने कहा कि इस धोखे के लिए भारत के लोग इरफ़ान हबीब और रोमिला थापर जैसे वामपंथी इतिहासकारों को कभी माफ़ नहीं करेंगे.

एक यूजर ने कहा कि अब इतिहास ही कुछ इतिहासकारों के मुंह पर करारे तमाचे मार रहा है. रोमिला थापर और इरफान हबीब जैसे कुछ लोग इतिहासकार नहीं देश के गद्दार हैं.