उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए अगर आप पहाड़ों की ओर रुख करने की सोंच रहे हैं तो कुछ दिनों के लिए अपने प्लान कैंसल कर दें, क्योंकि जाम और भीड़ से हिमाचल और उत्तराखंड (Himachal Pradesh and Uttrakhand) के पहाड़ बेहाल है। मनाली, मसूरी, नैनीताल और शिमला जैसे लोकप्रिय पर्यटक स्थलों की हालत सबसे ख़राब है। यहाँ ना तो पार्किंग के लिए जगह बची है और ना ही होटलों में। सबसे पहले तो इन जगहों तक पहुँचना ही मुश्किल है क्योंकि पूरा हाइवे जाम है। जहाँ देखो बस गाड़ियों की लम्बी लम्बी कतारें नज़र आ रही है। इस भीड़ ने ना सिर्फ पर्यटक बलि प्रशासन और स्थानीय निवासी भी परेशान हैं।

हल्द्वानी – नैनीताल रोड

शिमला और मनाली के मॉल रोड पर पाँव रखने की भी जगह नहीं है। मनाली से रोहतांग जाने वाले हाइवे पर कई किलोमीटर लाम्बा जाम है। हालात इतने ख़राब है कि लोग बीच रास्ते से ही वापस लौट रहे हैं। नैनीताल की बात करें तो यहाँ 2 हज़ार गाड़ियों के लिए पार्किंग की व्यवस्था है लेकिन रोजाना 4 से 5 हज़ार गाड़ियाँ पहुँच रही है। वीकेंड में तो हालात बदतर हो रहे हैं। गाड़ियों को नैनीताल से 15 किलोमीटर पहले ही रोक दिया जा रहा है।

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हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच इतना जाम है कि देहरादून पहुंचना भी मुश्किल हो रहा है। मसूरी पहुँचने के लिए देहरादून बस स्टैंड पर एक छोटा गाँव बस गया है। भीड़ इतनी ज्यादा है कि बसों की संख्या भी कम पड़ गई है। अगर किसी तरह मसूरी पहुँच भी गए तो भीड़ आपके छुट्टियों का मज़ा किरकिरा करने के लिए वहां पहले से मौजूद होगी। चार धाम यात्रा की वजह से उत्तराखंड में भीड़ अचानक से काफी बढ़ गई है, जिसे सँभालने में प्रशासन के हाँथ पाँव फूल रहे हैं।

रोहतांग पास की स्थिति

शिमला और मनाली जाने वाले तो बीच रास्तों से वापस लौटने को मजबूर हो रहे हैं। ये दोनों जगह पूरी तरह चोक हो चुके हैं। रोहतांग हाइवे पर तो स्थिति बाद से बदतर है। ना सिर्फ दिल्ली -NCR बल्कि हरियाणा और पंजाब से भी लोग हिमाचल पहुँच रहे हैं जिस कारण भीड़ को संभालना मुश्किल हो रहा है। पेट्रोल और डीजल की भी किल्लत होने लगी है अब। गाड़ियों के लम्बे जाम, इंजन और AC की वजह से पहाड़ों पर भी अब गर्मी महसूस होने लगी है।

अगर आप जाना ही चाहते हैं तो किसी नए जगह का प्लान बनाएं जो इन लोकप्रिय हिल स्टेशनों से दूर हो और जहाँ भीड़ ना हो।

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