अक्सर हमें सुनने को मिलता है कि देश में डर का माहौल है। देश का मुसलमान डरा हुआ है। असहिष्णुता (Intolerance) बढ़ रही है। लेकिन देश की राजधानी में हाल के दिनों की दो घटनाएं बताती है कि देश में कितना डर का माहौल है और वो जो डरा हुआ कौम है वो कितना डरा हुआ है।

ईद के दिन की वो घटना आपको याद ही होगी, जिसमे कार से कुचल कर नमाजियों की मौत की अफवाह के बाद पूरी कौम सड़क पर उतर कर सरकारी बसों में तोड़ फोड़ करता है और पूरी दिल्ली में दहशत का माहौल बना देता है। बाद में पता चला कि जिस कार से नमाजियों के कुचलने की अफवाह उड़ाई गई थी वो कार उन्ही के कौम के शाहरुख़ ने चुराई थी और किसी नमाजी की मौत भी नहीं हुई थी। सडकों पर तांडव का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था लेकिन बाद में क्या पुलिसिया कारवाई हुई ये किसी को नहीं पता।

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दूसरी घटना रविवार रात की है, जब लिंचिंग की अफवाह के बाद एक बार फिर पूरी कौम सडकों पर उतर आती है और मंदिर में तोड़ फोड़ की जाती है। मूर्तियों को नुक्सान पहुँचाया जाता है। ये घटना किसी दूर दराज के इलाके का नहीं है बल्कि देश की राजधानी दिल्ली के पुरानी दिल्ली हौज क़ाज़ी (Hauz Qazi) इलाके का है। इस घटना का वीडियो भी सोशाल्मेडिया पर वायरल हुआ है। मंदिर के शीशे टूटे हुए और मूर्ति खंडित है। पुलिस का कहना है कि पार्किंग विवाद को ले कर ये विवाद हुआ जबकि स्थानीय लोगों का कहना है कि लिंचिंग की अफवाह फैलने के बाद पुरे मुस्लिम समाज के लोगों में इकट्ठे होकर मंदिर पर हमला किया।

सबसे बड़ी बात कि दूर दराज के इलाकों में भी लिंचिंग की घटना कवर करने और नेशनल डिबेट करने पहुँच जाने वाली मीडिया ने देश की राजधानी में इस घटना को कवर करना भी जरूरी नहीं समझा। कोई सड़क पर ठोकर खा कर गिरा मौलवी भी कह दे कि उसे लोगों ने जय श्री राम के नारे लगवाए और पीटा तो वो चार दिनों तक डिबेट का मुद्दा होता है। गुडगाँव मामले में देख चुके हैं ऐसा, जहाँ मामूली झगडे के बाद एक लड़के ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने उससे जय श्री राम के नारे लगवाए और पीटा लेकिन जब इलाके की cctv फुटेज चेक की गई तो मामला झूठा निकला

न जाने वो कौन सा देश है जहाँ के मुसलमान डरे हुए हैं।  न जाने वो कौन सा देश हैं जहाँ डर का माहौल है। क्योंकि हमने जिस डर के माहौल के बारे में सुना है उसमे तो लोग डर के मारे घरों में दुबके रहते हैं, सड़कों पर तांडव नहीं करते।

पुरानी दिल्ली की घटना से ना तो असहिष्णुता बढ़ी, ना नेशनल डिबेट हुआ, न सोशल मीडिया पर आउटरेज हुआ और न नेशनल मीडिया को इस बारे में कुछ पता चला। लेकिन फिर भी देश में डर का माहौल है और एक समुदाय विसेष डरा हुआ है।