भारत और चीन के बीच बढे तनाव के दौरान भारत सरकार ने 59 चाइनीज ऐप्स पर बैन लगा दिया था. इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला दिया गया. सरकार को शक था कि ये कंपनियां भारत के लिए जासूसी जैसा काम कर सकती है और भारतीय लोगों के डाटा चीन को दे सकती है. ऐप्स के बाद अब सरकार की नज़र उन चीनी कम्पनियों (chinese Companies) पर जो भारत में व्यापार करती है और उनके सम्बन्ध चीन की सेना पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी से है. सरकार ने ऐसे 7 कंपनियों की पहचान की है, जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से चीनी सेना से जुड़ी है.

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जिन 7 कंपनियों की सरकार ने पहचान की है, उनमें अलीबाबा, टेंसेंट, हुवावे, एक्सइंडिया स्टील्स लिमिटेड , जिंज़िंग कैथे इंटरनेशनल ग्रुप, चाइना इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप कॉरपोरेशन और एसएआईसी मोटर कॉरपोरेशन लिमिटेड ( एसयूवी एमजी हेक्टर की पैरेंट कपंनी) हैं.

इनमे से एक्सइंडिया स्टील्स लिमिटेड भारत और चीन के बीच सबसे बड़ी जॉइंट वेंचर है. जबकि जिंज़िंग कैथे इंटरनेशनल ग्रुप ने छत्तीसगढ़ में एक मैन्युफैक्चरिंग यूनिट 1000 करोड़ रुपये के निवेश से शुरू की है. हुआवे तो चीन के गौरव का प्रतीक है. इसे लेकर दुनिया भर के देशों की नज़रें टेढ़ी है. अमेरिका ब्रिटेन और सिंगापूर ने तो इसे बैन कर दिया है. भारत में भी हुआवे को बैन करने की तैयारी की जा रही है.

एसएआईसी मोटर कॉरपोरेशन लिमिटेड कंपनी भारत में सबसे लोकप्रिय एसयूवी एमजी हेक्टर की पैरेंट कंपनी है. ये गाड़ी एमडी मोटर्स द्वारा बनाई जाती है. नैनजिंग ऑटोमोबाइल भी एसएआईसी मोटर कॉरपोरेशन लिमिटेड की ही एक सब्सिडियरी कंपनी है, जो पहले चीन की सेना की व्हीकल सर्विसिंग यूनिट थी. एमजी मोटर्स भी शक के दायरे में है.

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जून में अमेरिका ने भी ऐसी 20 चाइनीज कंपनियों की पहचान की थी जो बिजनेस के अलावा भी बहुत कुछ कर रहे हैं. मसलन चीनी सेना के लिए जासूसी जैसा काम.

चीन सरकार का ख़ुफ़िया क़ानून 

अमेरिकी कांग्रेस के रक्षा सचिव की वार्षिक रिपोर्ट “सैन्य और सुरक्षा विकास, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना 2019 में इस बात का खुलासा है कि जून 2017 में चीन सरकार ने एक खुफिया कानून पारित किया था, जिससे सरकार की एजेंसियों को संदिग्धों के खिलाफ निगरानी करने, परिसर में छापा मारने और वाहनों और उपकरणों को जब्त करने की शक्ति मिली थी.

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इस क़ानून के अनुसार चीनी कंपनियों को ये निर्देश दिए गए थे कि वो जिस भी देश में काम करें, चीनी ख़ुफ़िया एजेंसी के साथ संपर्क में रहे और उनके साथ सहयोग करते रहें.

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