कहते हैं दोस्त और दुश्मन की पहचान मुसीबत के वक़्त में ही होती है. भारत मुसीबत के वक़्त से गुजर रहा है. कोरोना के कहर से जूझ रहा है और ऐसे वक़्त में लोगों को समाज और देश के असली दुश्मनों का चेहरा भी साफ़ साफ़ दिख रहा है. आज शुक्रवार है. जुम्मा का दिन. आज के दिन उत्तर प्रदेश से लेकर कर्नाटक तक देश और समाज के दुश्मनों ने पुलिस पर पत्थर बरसाए.

लॉकडाउन (Lockdown) की वजह से इकट्ठे होने की मनाही है. क्योंकि इससे वायरस का संक्रमण बढ़ने का खतरा है लेकिन इसके बावजूद नमाजी इकट्ठे हो कर नमाज पढने सड़क पर उतर आये. कोरोना की वजह से मक्का और मदीना जैसे धर्म स्थल भी बंद है. मंदिर भी बंद है. हर साल रामनवमी पर निकलने वाली शोभा यात्राएं भी इस बार नहीं निकाली गई. लेकिन मुस्लिमों को लगता है कि उन्हें नमाज पढने से रोकने के लिए मोदी कोरोना ले कर आया है.

शुक्रवार को जुमे की नमाज को लेकर यूपी से लेकर कर्नाटक तक बवाल हुआ. नमाजियों ने पुलिसवालों पर पत्थर बरसाए जिसमें कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं.

शुक्रवार को कर्नाटक के हुबली में लॉकडाउन के बावजूद कुछ लोग जुमे की नमाज मस्जिद में ही अता करने पहुंच गए. हुबली के मंतूर स्थित इस मस्जिद में भीड़ जुटने की सूचना पर पहुंची पुलिस पर वहां मौजूद नमाजियों ने पत्थर बरसाने शुरू कर दिए. इस पत्थरबाजी में चार पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. हुबली-धारवाड़ के पुलिस कमिश्नर आर. दिलीप ने कहा कि दोषियों की पहचान की जा रही है, पुलिस कड़ी कार्रवाई करेगी.

उत्तर प्रदेश के कन्नौज में भी ऐसा ही हुआ. लॉकडाउन के बावजूद जुमे की नमाज के लिए कन्नौज के हाजीगंज स्थित एक घर में नमाजियों की भीड़ जमा हुई थी. सूचना मिलने पर पुलिस की टीम इन नमाजियों को हटाने पहुंची लेकिन नमाजियों ने पुलिसकर्मियों पर ही हमला कर दिया. हालात बिगड़ते देख पुलिसकर्मी वहां से जान बचाकर भाग निकले.

कन्नौज के एसपी अमरेंद्र सिंह ने कहा, ‘एक घर में करीब 30 लोगों की भीड़ नमाज के लिए इकट्ठा हुई थी. सूचना मिलने पर जब पुलिस कॉन्स्टेबल पूछताछ करने पहुंचे तो उन्होंने पुलिसकर्मियों पर हमला कर दिया. इसके बाद आसपास के घरों की छतों से पत्थरबाजी होने लगी. घायल कॉन्स्टेबल्स को अस्पताल में भर्ती कराया गया है. कुछ लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है.’