देश में एक तरफ जहाँ भारतीय जनता पार्टी राज्य दर राज्य जीतते जा रही है वही भाजपा की छात्र इकाई एबीवीपी ने भी अपनी पकड़ युवा छात्रों पर बनाई हुई है। इसका सबसे ताज़ा उदाहरण है दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्र संघ (DUSU) चुनावों में एबीवीपी का फिर से सफल होना है।

इस साल एक बार फिर से ABVP ने डूसू चुनाव में अध्यक्ष समेत तीन पदों पर सफलता हासिल की वहीं कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई को सिर्फ एक सीट से संतोष करना पड़ा। वही अगर बात लेफ्ट और आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई की करें तो उन्हें सभी सीटों पर हार का सामना करना पड़ा।

dusu election polls

एबीवीपी के अंकिव बसोया ने जहाँ अध्यक्ष पद हासिल किया वही शक्ति सिंह उपाध्यक्ष और ज्योति चौधरी ने संयुक्त सचिव पद हासिल किया। एनएसयूआई के आकाश चौधरी ने सचिव पद पर सफलता हासिल की है। दिल्ली यूनिवर्सिटी में हुए छात्र संघ के चुनावों में तकरीबन एक लाख पैंतीस हजार छात्रों में से महज 44.46% छात्रों ने ही वोट किया ।

एबीवीपी को मिली इस सफलता के बाद आम आदमी पार्टी की छात्र इकाई ने ईवीएम में गड़बड़ी पर सवाल उठाये। ये आरोप आम आदमी के नेताओं का ट्रेडमार्क बन गया है और छात्रसंघ ही नहीं बल्कि देश में होने वाले हर चुनाव में हारने के बाद वे ईवीएम को कोस लेते हैं। आम आदमी पार्टी नेता गोपाल राय ने कहा की “डूसू चुनाव में जिस तरह की गड़बड़ियां सामने आई हैं वह हैरान करने वाली हैं। डूसू चुनाव से यह साबित हो रहा है कि भाजपा संसदीय चुनाव से पहले कोई दूसरा चुनाव हारना नहीं चाहती”।