ऑफिस के काम और मेट्रो सिटिज के भागदौड़ से फुर्सत निकाल कर अगर आप थोड़ी शांति की तलाश में हैं तो आप अपना बैग पैग कीजिये और निकल पड़िए उत्तराखंड की ओर। देव भूमि उत्तराखंड में यूँ तो कई पॉपुलर हिल स्टेशन हैं। लेकिन जिस छुपे नगीने पर जा कर आपको सुकून मिलेगा वो है कसार देवी (Kasar Devi)।

कई पॉपुलर हिल स्टेशन घूम चूका हूँ। इसलिए इस बार तय किया एक ऐसी जगह जाने का जो पॉपुलर न हो। सर्च करने पर कई ऑप्शन आ रहे थे जो मुझे और कन्फ्यूज कर रहे थे। फिर एक जगह पर नज़र ठहर गई और वो जगह थी कसार देवी। थोडा गूगल किया तो पता चला ये जगह तो ऐतिहासिक है। फिर मैंने ट्रेवल प्लान बनाया और निकल पड़ा।

सूर्यास्त

दिल्ली से रात 12 बजे हमारा सफ़र शुरू हुआ। सुबह 7 बजे तक काठगोदाम पहुंचे। काठगोदाम से अल्मोड़ा के लिए टैक्सी लिया। यूँ तो काठगोदाम से शेयर टैक्सी भी मिलते हैं लेकिन अगर आप फोटोग्राफी के शौक़ीन हैं तो प्राइवेट टैक्सी कर लें क्योंकि काठगोदाम से अल्मोड़ा के रस्ते में आपको कई ऐसे लोकेशन मिलेंगे कि आप फोटोज क्लिक करने से खुद को रोक नहीं पायेंगे। शेयर टैक्सी आपको 300 रुपये में मिल जायेंगे और प्राइवेट टैक्सी 1200 तक में। साढ़े तीन घंटे में हम अल्मोड़ा पहुँच गए।

अल्मोड़ा पहुँच कर लोकल टैक्सी लिया कसार देवी के लिए। अल्मोड़ा -बिनसर हाइवे पर अल्मोड़ा से करीब 8 किलोमीटर दूर है कसार देवी गाँव। पहली बार पहाड़ के लोकल टैक्सी में सफ़र किया और अद्भुत अनुभव था। वो दरअसल टैक्सी नही एक जीप थी, जिसमे कई लोकल पहाड़ी लोग बैठे थे। उनकी कुमाउनी भाषा कुछ समझ तो नहीं आ रही थी लेकिन बड़ा ही अच्छा लग रहा था। कसार देवी पहुँच कर लगा ये वाकई में उत्तराखंड के मुकुट में छुपा एक नगीना। कसार में वो सब कुछ है जो बैगपैकर्स के लिए इसे एक परफेक्ट डेस्टिनेशन बनाती है- अच्छे लोग, बजट फ्रेंडली, शांत, भीड़ का नामोनिशान नहीं, ना गाड़ियों की भीड़, कुछ ट्रेक्स और शानदार लैंडस्केप।

हमारे रेस्ट हाउस की बालकनी से नजार

आकर्षण

नाम से ऐसा लगता है जैसे ये कोई तीर्थ स्थल हो लेकिन ऐसा है नहीं। कसार एक गाँव है। उस गाँव में है कसार माता का मदिर जो दूसरी शताब्दी में बना था और उसी मंदिर के नाम पर इस गाँव का नाम पड़ा कसार देवी। अल्मोड़ा -बिनसर हाइवे पर अल्मोड़ा से करीब 8 किलोमीटर दूर कश्यप हिल पर स्थित है कसार देवी गाँव। एक बेहद छोटा गाँव।

यह दरअसल एक हिप्पी ट्रेल है जो पर्यटकों को इस शांत गाँव की ओर आकर्षित करता है। 1890 में स्वामी विवेकानंद ध्यान के लिए कसार देवी मंदिर में आये थे और कई महीनों तक यहाँ रहे। आध्यात्म की खोज में पश्चिमी देशों से कई यात्री और सन्यासी कसार देवी आये और यहीं बस गए। अमेरिकी कवि एलन गिन्सबर्ग, तिब्बती बौद्ध अंजोरिका गोविंदा, अमेरिकी गायक-गीतकार बॉब डायलन, अंग्रेजी संगीतकार जॉर्ज हैरिसन थे और डेनिश सन्यासी sunyata बाबा इन सभी को कसार देवी की आध्यात्मिक शांति ने आकर्षित किया।

यहाँ की खाली खाली सड़कें, आस पास छोटी छोटी पहाड़ियों पर खड़े चीड़ के जंगल और इनके साथ दिखाई पड़ते नंदा देवी, पंचाचूली और त्रिशूल पर्वत  के नयनाभिराम दृश्य इस जगह को अति विशिष्ट बना देते हैं और इसे हिप्पी हिल के तौर पर पहचान दिलाते हैं। कई सारे तिब्बती धर्मगुरु भी आ कर बस गए और उन्होंने यहाँ बौद्ध साधना केंद्र की स्थापना की।

क्या करें और कहाँ घूमे

कसार आने से पहले हमने सोचा था कि छोटा गाँव है, एक दिन में घूम कर अगले दिन बिनसर निकल लेंगे। बिनसर यहाँ से महज 16 किलोमीटर है। लेकिन कसार ने हमें बाँध लिया और हम 3 दिनों तक वहां रुके। कसार देवी मंदिर तक ट्रेक करते हुए जाना एक बहुत ही शानदार अनुभव था। बौद्ध साधना केंद्र में कुछ देर की साधना आपकी सारी परेशानियों और चिंताओं को हर लेगी।

आसपास और भी कई गाँव है जहाँ आप ट्रेकिंग करते हुए जा सकते हैं और कुमाऊं की संस्कृति को करीब से महसूस कर सकते हैं। कई विदेशी पर्यटक आपको अपनी पीठ पर बैग टाँगे या फिर साइकिल से कसार नापते मिल जायेंगे।

कसार में टूरिस्ट रेस्ट हाउस के पास है दीनापानी ग्राउंड। ये मैदान पहाड़ की चोटी पर है और यहाँ पहाड़ी बच्चे आपको फुटबॉल खेलते हुए दिन के किसी भी वक़्त मिल जायेंगे। इस मैदान में बैठकर आप बिनसर की चोटियों को देख सकते हैं। इस मैदान से सूर्योदय और सूर्यास्त का शानदार नजारा देखने को मिलता है।

बिनसर महज 16 किलोमीटर की दूरी पर है कसार से, जागेश्वर करीब 40 किलोमीटर दूर है। ये दोनों जगहें भी आप घूम सकते हैं।

वैज्ञानिक महत्त्व

कसार देवी का वैज्ञानिक महत्त्व भी है। कुछ समय पहले नासा के वैज्ञानिकों ने शोध कर के बताया कि ये पहाड़ वेन एलन नाम की बेल्ट पर स्थित है, जिसकी वजह से यहाँ पर पृथ्वी का चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न होता है और इस वजह से इधर असीम ऊर्जा का केंद्र बन जाता है। कहते हैं कि जिन्होंने इस ऊर्जा से सामंजस्य बैठा लिया उन्होंने अपने जीवन में आध्यात्मिक उत्थान को पा लिया। शायद यही वो कारण रहा होगा जिसकी वजह से यहाँ रह कर कई सारे विद्वानों ने अपनी अद्भुत रचनाएँ दुनिया को दी। शायद यही कारण था कि स्वामी विवेकानंद ने यहाँ पर ध्यान लगाया।

कहाँ ठहरे

यूँ तो कसार देवी में कोई बड़ा होटल नहीं है लेकिन कुछ छोटे छोटे गेस्ट हाउस हैं। कसार जंगल रिसॉर्ट, इम्पीरियल हाइट्स (लक्जरी कॉटेज), हॉट्स होस्टल (बजट फ्रेंडली), मोक्ष, टूरिस्ट रेस्ट हाउस, डोलमा गेस्टहाउस के अलावा कुछ और रेस्ट हाउस हैं। यहाँ आप होमस्टे भी ले सकते हैं। स्थानीय लोग कुछ पैसे लेकर पर्यटकों को ठहराते हैं। उनके साथ रहना आपके लिए नया अनुभव होगा.

और हाँ यहाँ पहुँच कर कुमाउनी खाना जरूर चखें। हमने जहाँ कुमाउनी खाना खाया था उस छोटे से रेस्टोरेंट का नाम था “द कसार किचेन” और उस खाने का स्वाद अब तक हमारी जुबान पर है।

कसार देवी जो जगह है जहाँ एक कोई एक बार आ जाये तो बार बार आना चाहेगा. दरसल इस गाँव से, इस गाँव की वादियों से, यहाँ की शांति से, यहाँ के लोगों से आपको इश्क हो जायेगा.