स्वदेशी कोरोना वैक्सीन Covaxin का ह्यूमन ट्रायल देश में शुरू हो चुका है. अभी पहले फेज का ट्रायल है. हरियाणा और पटना के बाद दिल्ली एम्स (Delhi Aiims) में भी Covaxin का ह्युमन ट्रायल शुरू हुआ तो ट्रायल में हिस्सा लेने के लिए वॉलंटियर्स के बीच होड़ लग गई है. दरअसल शनिवार को एम्स की एथिक्स कमिटी ने ट्रायल की मंजूरी दी. उसके बाद अस्पताल प्रशासन ने लोगों को आमंत्रित किया कि वो आये और ट्रायल में शामिल होने के लिए वॉलंटियर बने. कुछ ही घंटों में अस्पताल के बाहर ट्रायल मे शामिल होने के लिए लाइन लग गई.

एम्स दिल्ली में फेज वन के ट्रायल में 100 लोगों की जरूरत थी, लेकिन हज़ार से भी ज्यादा लोग पहुँच गए. एम्स में कोविड वैक्सीन प्रोजेक्ट के प्रिंसिपल इनवेस्टिगेटर व कम्युनिटी मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. संजय राय ने कहा कि ट्रायल के लिए वॉलंटियर्स बनने के लिए जो फोन नंबर जारी किया गया था, उस पर लगातार कॉल आ रही हैं. जिस प्रकार लोगों का इस ट्रायल से जुड़ने का उत्साह देखा जा रहा है, वह हमारे लिए भी किसी जोश से कम नहीं है. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने ईमेल व वॉट्सऐप के जरिए भी संपर्क किया है. हमारी कोशिश है कि हम हर किसी को जवाब दें और हमने यह काम शुरू कर दिया है.

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इस वैक्‍सीन का ट्रायल देश में अलग-अलग शहरों के 14 रिसर्च इंस्‍टीट्यूट्स में किया जा रहा है. इन शहरों में नई दिल्ली, रोहतक, हैदराबाद, विशाखापट्नम, पटना, कानपुर, गोरखपुर, भुवनेश्वर, चेन्नई और गोवा शामिल हैं. ट्रायल में यह देखा जाएगा कि वैक्‍सीन देने से किसी तरह का खतरा तो नहीं है, उसके साइड इफेक्‍ट्स क्‍या हैं। कोविड-19 के अलावा लिवर और फेफड़ों पर कैसा असर हो रहा है, यह भी जांच की जाएगी. इसीलिए पहले फेज को ‘सेफ्टी एंड स्‍क्रीनिंग’ कहा गया है.

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR), नेशनल इंस्‍टीट्यूट ऑफ वायरलॉजी (NIV) और भारत बायोटेक ने मिलकर Covaxin नाम से कोरोना की वैक्‍सीन को डेवलप किया है. इसे 15 अगस्त तक लॉन्च करने की कोशिश की जा रही थी. लेकिन अब ऐसा संभव नहीं है. क्योंकि इस वैक्सीन को ट्रायल के तीन फेज से गुजरना है और अभी तो सिर्फ पहला फेज ही है.