उत्तरप्रदेश के सहारनपुर में साल 2017 के मई महीने में हुए जातीय हिंसा के आरोप में एक साल से जेल में बंद चंद्रशेखर ‘रावण’ को रिहा कर दिया गया है। वैसे अगर चंद्रशेखर को रिहा नहीं भी किया जाता तो करीब एक महीने में उनकी रिहाई तय मानी जा रही थी। ऐसे में दलितों के गुड बुक्स में आने के प्रयास में लगी भाजपा ने रिहाई से पहले ही भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर को रिहा कर के राजनीतिक माइलेज लेने का प्रयास किया है।

bhim army chief chandrashekhar ravan

वैसे जेल से निकलने के बाद मिडिया से मुखातिब हो कर दलित नेता चंद्रशेखर ने ये साफ़ कर दिया की भाजपा ने भले ही पोलिटिकल माइलेज लेने के लिए उन्हें रिहा किया हो पर वे अपने समाज के लोगों को भाजपा के खिलाफ वोट देने के लिए प्रोत्साहित करेंगे और 2019 के चुनावों में भाजपा को हराएंगे। उन्होंने आगे कहा की मायावती उनकी बुआ हैं और उन्हें उनसे प्यार है।

Chandrshekhar Ravana

ये देखना दिलचस्प होगा की SC/ST एक्ट पर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को पलट कर सवर्णों का गुस्सा झेल रही भाजपा अपने इस नए दांव से दलितों के बीच अपनी जगह बना पाती है या नहीं। इसके अलावा चन्द्रशेखर रावण की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को हवा दे कर कहीं भाजपा बसपा के खिलाफ एक नए हथियार को खड़ा करने पर भी विचार ज़रूर कर रही होगी। जिस हथियार का वो 2019 में होने वाले लोकसभा चुनावों में डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तौर पर इस्तेमाल कर पाए।