कोरोना कीई मार से जूझ रही पूरी दुनिया मदद के लिए भारत की तरफ देख रही है. चाहे अमेरिका या ब्राजील जैसे बड़े देश हों या भूटान और श्रीलंका जैसे छोटे देश. भारत की हमेशा से पॉलिसी रही है वसुधैव कुटुम्बकम. और इसी का पालन करते हुए भारत दुनिया भर के देशों में दवाइयां और अन्य जरूरी सहायता उपलब्ध करवा रहा है. ऐसा नहीं है कि भारत में कोरोना का असर नहीं है. लेकिन खुद के साथ साथ दूसरों का भी ख्याल रखना भारत से बेहतर कौन कर सकता है. शायद इसलिए जब भारत ने ब्राजील (Brazil) की मदद की तो ब्राजील ने इसकी तुलना हनुमान (Hanuman) और संजीवनी बूटी से कर दी.

दुनिया भारत और भारत के पीएम नरेंद्र मोदी को सलाम कर रही है लेकिन भारत के लिबरल गैंग को अपने पीएम और अपने देश को नीचा दिखने से ही फुर्सत नहीं. अब बाजील ने जब हनुमान और संजीवनी बूटी से तुलना कर दी है तो स्वाभाविक है कि लिबरल गैंग के सीने की जलन और बढ़ जायेगी.

भारत ने कहा था कि जिन देशों को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवाई की सख्त जरूरत है और जहां कोरोना वायरस के मामलों का असर काफी ज्यादा है वहां कुछ निश्चित दवाइयों की सप्लाई की जाएगी. भारत ने पहले अमेरिका और फिर ब्राजील को इस दवाई की सप्लाई की. इसपर ब्राजीली राष्ट्रपति जेर बोलसोनारो ने धन्यवाद करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी है, जिसमें इस मदद की तुलना हनुमान द्वारा लाई गई संजीवनी से की गई है.

ब्राजीली राष्ट्रपति ने कहा कि संकट के इस समय में जिस तरह भारत ने ब्राजील की मदद की है, वह बिल्कुल वैसा ही है जैसा रामायण में हनुमान जी ने राम के भाई लक्ष्मण की जान बचाने के लिए संजीवनी लाकर किया था. बता दें कि बुधवार को ही देश में हनुमान जयंती का त्योहार मनाया जा रहा था. और उसी दिन ब्राजील के राष्ट्रपति ने चिट्ठी लिखी.

अब इस चिट्ठी को पढ़ के दो बातें होंगी- लिबरल गैंग ब्राजील के राष्ट्रपति को कम्युनल और भक्त घोषित कर देगा, दूसरी बात ये होगी कि लिबरल गैंग के सीने में ज्वालामुखी धधकने लगेगा. ये ज्वालामुखी तो 2014 से ही धधक रहा है. पता नहीं अभी कितने और साल ये ज्वालामुखी धधकना लिखा है.