देश की आईटी कैपिटल बेंगलुरु (Bengalore Riots) में अब शांति है. लेकिन अब इन दंगों से जुड़े खुलासे होने शुरू हुए हैं. पता चला है कि बेंगलुरु को जलाने में भी उसी संगठन PFI का हाथ था जिसने CAA विरोध की आड़ में पूरे देश में हिंसा भड़काने की साजिश रची थी.

PFI का एक राजनीतिक संगठन है सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI). इसी कट्टरपंथी संगठन की मदद से बेंगलुरु को जलाने का प्लान था. बेंगलुरु पुलिस ने एक स्थानीय SDPI नेता मुजम्मिल पाशा को भी गिरफ्तार किया है. आरोपी पाशा पहले सगायपुरा वार्ड से ब्रुहत बेंगलुरु महानगर पालिका का चुनाव भी लड़ चुका है.

दंगाइयों का प्लान था सभी पुलिसवालों की हत्या करना 

जिस तरह से एक फेसबुक पोस्ट को लेकर तुरंत ही इतनी भारी संख्या में शांतिप्रिय लोग सड़कों पर उतर पड़े, उससे ये शक गहरा रहा है कि इसकी तैयारी पहले से ही कर ली गई थी. नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस की शुरूआती जांच में सामने आया है कि 5 दंगाइयों ने 300 लोगों का गैंग बनाया था. उनका प्लान सभी पुलिसवालों को जान से मारने का था. हमलावरों ने हिंसा के दौरान पुलिस को निशाना बनाने के लिए गुरिल्ला जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया. बेंगलुरु हिंसा में जो कुछ हुआ वह कई पुराने पुलिसकर्मियों ने बहुत दिनों बाद देखा होगा. वहीं नए भर्ती हुए पुलिस कर्मियों के लिए यह एक चौंकाने वाला अनुभव रहा.

बेंगलुरु के कवलबीरसांद्रा, केजी हल्ली और डीजे हल्ली इलाके की गलियां कागी संकरी है और इन्ही संकरी गलियों का फायदा उठा कर दंगाइयों ने गुरिल्ला तकनीक से हमले किये. दमकल वाहनों को निशाना बनाया., पुलिसवालों की गाड़ियों को आग लगा दिया. दूसरे इलाकों से पहुंची पुलिस टीम पर पत्थरों, ईंटों, बोतलों और अन्य धारदार हथियारों से हमले किये गए.

वाहनों को आग्लगा कर रास्ते ब्लॉक किये गए थे ताकि पुलिस घटनास्थल तक नहीं पहुँच पाए. स्ट्रीट लाइट्स को पत्थर मार कर तोड़ डाला गया ताकि इलाके में अँधेरा हो जाए.