कोरोना ने अमेरिका (America) में इस तरह से कहर बरपाया कि सुपर पॉवर होने का दम भरने वाला अमेरिका घुटनों पर आ गया. कोरोना के मामलों में और कोरोना की वजह से हुई मौत के मामलों में अमेरिका टॉप पर है. न्यूयॉर्क तो कब्रिस्तान बना हुआ है. अमेरिका की अर्थव्यवस्था डांवाडोल हो चुकी है. इस वजह से अमेरिका चीन पर भड़का हुआ है. अब चीन (China) को झटका देने के लिए अमेरिका (America) ने अपनी कंपनियों की उत्पादन इकाइयों को चीन से वापस लाने की तैयारी कर ली है. इस संबंध में एक बिल सीनेट में पास कर दिया गया है.

अमेरिकी सांसद मार्क ग्रीन ने संसद में द ब्रिंग अमेरिकन कंपनी होम ऐक्ट’ नाम का बिल पेश किया. इस एक्ट के तहत के इन कंपनियों को वापस लगाने की पूरी लागत और आयात पर लगने वाले आयात शुल्क को कवर करने के लिए कहा गया है. ग्रीन ने कहा कि देश अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए अमेरिका में निवेश आकर्षित करना जरूरी है. हालांकि, अमेरिकी कंपनियों के लिए अपने देश आने में एक सबसे बड़ी बाधा लागत की होती है. इसलिए हमें उनके लिए राह को आसन बनाना होगा. उन्होंने ये भी कहा कि चीन भरोसेमंद नहीं है. इसलिए चीन पर निर्भरता कम करने के जरूरत है.

कोरोना वायरस फैलाने को लेकर चीन पूरी दुनिया के निशाने पर है. चीन में कारोबार कर रही कंपनियों को लग रहा है कि आने वाले वक़्त में ट्रेड वॉर शुरू हो सकता है इसलिए सभी कंपनियां चीन से अपना कारोबार समेत कर बाहर निकल रही है. करीब 1000 कम्पनियाँ ऐसी हैं जो इस वक़्त चीन से अपनी उत्पादन इकाइयों को कहीं और शिफ्ट कर रही हैं. इनमे से 300 कंपनियों की बातचीत भारत सरकार से चल रही है. हाल में दो कंपनियों ने भारत में अपना प्रोडक्शन यूनिट लगाने का ऐलान कर दिया है. इनमे से एक जर्मन फुटवियर कंपनी है जो आगरा में अपना प्लांट लगाएगी और एक लावा मोबाइल कंपनी है जो नियेदा में अपना प्लांट लगाएगी.